जन्माष्टमी ने दिखाई आस्था, सेवा और संस्कृति की तस्वीर, नूरपुर में धार्मिक आयोजन के बीच सियासत भी रही चर्चा में

 जन्माष्टमी ने दिखाई आस्था, सेवा और संस्कृति की तस्वीर, नूरपुर में धार्मिक आयोजन के बीच सियासत भी रही चर्चा में

दो दिन कृष्ण भक्ति में डूबा शहर, फलाहार सेवा से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन; मंदिर-किले तक सड़क निर्माण का मुद्दा फिर उठा


नूरपुर : विनय महाजन /

प्रदेश स्तरीय दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान नूरपुर पूरी तरह कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। श्री बृजराज स्वामी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, गलियों और बाजारों में गूंजता श्रीकृष्ण का जयघोष तथा सेवा में जुटे सैकड़ों हाथों ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया। इस बार का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सेवा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की तस्वीर भी पेश करता नजर आया। हालांकि, धार्मिक आयोजन के बीच राजनीतिक गतिविधियां और नेताओं को दर्शन के लिए प्राथमिकता दिए जाने को लेकर भी लोगों में चर्चाएं सुनने को मिलीं। श्रद्धालुओं की लंबी कतार के बीच कुछ नेताओं को पहले दर्शन का अवसर दिए जाने को लेकर लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।


जन्माष्टमी महोत्सव की खास बात सेवा भावना रही। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आर.के. महाजन परिवार की ओर से स्थानीय लोगों के सहयोग से दो दिवसीय फलाहार सेवा स्टाल लगाया गया। यहां श्रद्धालुओं को फलाहार, पानी और अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। सेवा में जुटे लोग लगातार श्रद्धालुओं की सहायता करते और उनका आत्मीयता से स्वागत करते दिखाई दिए। इस सेवा भावना ने धार्मिक आयोजन को जनसेवा से जोड़ने का काम किया।


महोत्सव के दौरान प्रशासन ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली और मंदिर कमेटी ने आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया। नूरपुर शहर की सजावट इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही। शहर को वृंदावन की तर्ज पर रोशनी से सजाने का प्रयास किया गया, जिससे रात के समय पूरा शहर जगमगाता नजर आया और श्रद्धालुओं के लिए उत्सव का आकर्षण और बढ़ गया।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी जन्माष्टमी महोत्सव में अपनी अलग छाप छोड़ी। प्रदेश के इंडियन आइडल फेम अनुज शर्मा, कुखेड़ गांव के बॉलीवुड गायक डॉ. गगन सिंह, चंबा के लोकगायक काकू राम ठाकुर और कांगड़ा के कुमार साहिल जैसे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचल की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिला।


महोत्सव के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा नूरपुर किले से श्री बृजराज स्वामी मंदिर तक पक्की सड़क निर्माण का भी रहा। मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन ऐतिहासिक किले में स्थित है और किले से मंदिर तक पक्की सड़क का अभाव श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव का शुभारंभ करते हुए इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत करने का आश्वासन दिया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मुद्दे पर हर वर्ष आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान धरातल पर नहीं हो पाया है।


श्री बृजराज स्वामी मंदिर, नूरपुर किला और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से बड़ी संभावनाएं रखते हैं। जन्माष्टमी के दौरान उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यदि मंदिर, ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय कलाकारों और पर्यटन को एक समग्र योजना के तहत विकसित किया जाए तो क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। मंदिर कमेटी की ओर से मंदिर को आधुनिक स्वरूप देने के प्रयास किए गए हैं, हालांकि इससे जुड़ा मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।


नगर परिषद नूरपुर की अध्यक्ष नीति महाजन ने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, प्रशासन, मंदिर कमेटी तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि समस्त जनता ने दो दिवसीय जन्माष्टमी मेले के दौरान अनुशासन, शिष्टाचार और मधुरता का परिचय देते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


गौरतलब है कि नीति महाजन आर.के. महाजन परिवार की पुत्रवधू हैं, जबकि उनके पति गौरव महाजन नगर परिषद नूरपुर के पूर्व पार्षद रह चुके हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के चलते इस बार जन्माष्टमी आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं का पहलू भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।


कुल मिलाकर नूरपुर की जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सेवा, संस्कृति, स्थानीय प्रतिभा, सामाजिक सहभागिता और क्षेत्र के पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी सामने रखा। अब जरूरत इस बात की है कि जन्माष्टमी जैसे बड़े आयोजनों से पैदा होने वाली ऊर्जा को नूरपुर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के स्थायी विकास से जोड़ा जाए।

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