दिव्यांगता को मात देकर पलक ने रचा सफलता का नया इतिहास
दिव्यांगता को मात देकर पलक ने रचा सफलता का नया इतिहास
80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता के बावजूद 12वीं में शानदार सफलता, अब डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन की पढ़ाई की ओर कदम
धर्मशाला
हौसले मजबूत हों तो शरीर की सीमाएं भी सपनों की राह नहीं रोक सकतीं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रैत की होनहार छात्रा पलक चौधरी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से यह साबित कर दिखाया है।
80 प्रतिशत से अधिक शारीरिक दिव्यांगता और सेरेब्रल पाल्सी के कारण चलने में असमर्थ पलक ने मार्च 2026 में 12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन पर प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण की और अब ज्ञान ज्योति कॉलेज, राजोल में डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन में प्रवेश लेकर अपने भविष्य की नई शुरुआत की है।
पलक की सफलता में परिवार के साथ-साथ रैत स्कूल के शिक्षकों का भी अहम योगदान रहा। उनकी उच्च शिक्षा में सहयोग के लिए प्रधानाचार्य शमशेर भारती और समस्त शिक्षकों ने प्रार्थना सभा में पलक को 51 हजार रुपये की सहयोग राशि भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया। वहीं अध्यापिका अनुपम ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद के लिए अपनी लिखी पुस्तक भी उन्हें उपहार स्वरूप प्रदान की।
गुरुजनों से मिले इस स्नेह और सहयोग से पलक भावुक हो उठीं और उन्होंने सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।
पलक का चयन सरकारी संस्थान डाइट धर्मशाला में भी हुआ था, लेकिन घर से दूर होने के कारण उन्होंने आवागमन की सुविधा को देखते हुए राजोल स्थित निजी संस्थान में प्रवेश लेना उचित समझा।
पलक की कहानी केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और उम्मीद की मिसाल है। उन्होंने साबित किया है कि शरीर की सीमाएं इंसान की उड़ान को नहीं रोक सकतीं। उनकी यह उपलब्धि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।

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