पंचायत व गांव वासियों ने पूरा जोर लगाया, पर नहीं वन भूमि से अवैध कब्जा हट पाया बीजेपी सरकार मे न व्यवस्था परिवर्तन सरकार में
पंचायत व गांव वासियों ने पूरा जोर लगाया, पर नहीं वन भूमि से अवैध कब्जा हट पाया बीजेपी सरकार मे न व्यवस्था परिवर्तन सरकार में
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 7 साल से वन विभाग की फाइलों में उलझ कर रह गया एक करोड़ों रुपए की भूमि पर आतिक्रमण का मामला।राजेश सिंह पठानिया सह निदेशक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ यह जानकारी एक भेंट वार्ता मे देते हुए बताया कि नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में अवैध कब्जो की गाथाएं काफी है लेकिन आज तक अवैध कब्जो को छुड़ाने के लिए जनहित में धरातल पर कोई कार्यवाही नहीं हुई चाय हिमाचल प्रदेश में किसी भी सियासी दल की पार्टी की सरकार हो जिसको लेकर कई प्रश्न जनता की जुबान पर क्षेत्र में चर्चित है l यह किस्सा पंजाब सीमा से सटे हिमाचल प्रदेश में कंडवाल के सड़क किनारे स्थित वन विभाग की करोड़ों की वन भूमि पर कई वर्ष पहले हुए अवैध अतिक्रमण का। जिसको लेकर लोगों व पंचायत द्वारा किए गए सारे प्रयास निष्फल हो चुके हैं। कंडवाल क्षेत्र में जन समुदाय का कहना है कि गत कई वर्ष सेवन भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के प्रयास लगातार किए गए हैं। सन 2022 में कंडवाल पंचायत द्वारा भी एक प्रस्ताव पारित करके इस भूमि पर सभी प्रकार का निर्माण कार्य करने पर रोक लगाने तथा करोड़ों की इस भूमि पर अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग की गई थी। उसे समय हिमाचल में भाजपा की सरकार थीl उसी समय इस मामले में 2022 में तहसील दार नूरपुर द्वारा एसडीम महोदय को एक पत्र लिखकर इस वन भूमि से अवैध कब्जे को हटाने की मांग की थी। पर उसके बावजूद यह कब्जा तो क्या हटाया जाना था बल्कि बार-बार इस भूमि पर निर्माण कार्य होता रहा। अभी हाल ही में यहां पर काफी मात्रा में ईंटों की सहायता से निर्माण कार्य करने पर स्थानीय लोगों द्वारा प्रशासन व संबंधित विभाग के ध्यान में पुनः लाते हुए संज्ञान लेने की मांग उठाई गई है। इस प्रकरण में वन विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी पर प्रश्न चिन्ह ही नहीं लग रहा बल्कि दोहरा मापदंड भी देखने को मिलता है। इतना ही नहीं हाल ही में भड़वार के पास खड्ड के समीप स्थानीय लोगों द्वारा करीब 7 लाख की सामूहिक राशि से एक शमशान घाट बनवाया गया था। इससे वन विभाग ने आनन-फानन में मशीनरी की सहायता से तोड़ दिया। जबकि कंडवाल में करोड़ों की वन भूमि पर किया गया एक परिवार द्वारा अवैध कब्जा हटा पाने में नाकाम रहा है। पता चला है कि जब वन विभाग कुछ साल पहले इस अतिक्रमण को हटाने आया था। एक राजनीतिक दल के नेता ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए विभाग को इस कार्य को करने हेतु रोक दिया था। राजेश पठानिया ने स्पष्ट किया कि कब्जाधारकों द्वारा हाल ही में वन विभाग की भूमि पर ईंटों द्वारा अवैध निर्माण किया गया है और विभाग कोई भी कार्यवाही करने में नाकाम रहा है। व्यवस्था परिवर्तन सरकार के 3:30 साल बीत चुके हैं लेकिन अभी तक ना तो वन भूमि से अवैध कभी हटे हैं ना राजस्व भूमि से अवैध कब्जे हटाने में व्यवस्था परिवर्तन सरकार का प्रशासन ढीला हैl उधर उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में व्यवस्था परिवर्तन सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वन भूमि से अवैध कब्जे हटाए जाए l प्रदेश में सरकार अवश्य बदली लेकिन प्रशासन की कार्यवाही इस तरह से पैडिंग चलती रही इस मामले मेंl इस मामले में डीएफओ संदीप कोहली नूरपुर का कहना है कि कब्जे का रिकार्ड देखा जा रहा है व पाया गया है कि इस मामले का ट्रायल चल रहा है। इस कब्जे की सुनवाई कलेक्टर कम डीएफओ की अदालत कर रही है। इस बारे आगामी कुछ समय के भीतर निर्णय दिया जा सकता है।

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