वित्तीय स्थिति के अभाव के बाद भी सरकार जनता की आवाज पर नए जिलों के गठन करने के मूड में
वित्तीय स्थिति के अभाव के बाद भी सरकार जनता की आवाज पर नए जिलों के गठन करने के मूड में
नूरपुर : विनय महाजन /
हिमाचल प्रदेश सरकार आने वाले समय में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव चिरकाल से चली आ रही है मांगो को लेकर जनहित में कर सकती है l सरकार की गोपनीय एजेंसीयो की रिपोर्ट के माध्यम से यह पता चला है कि प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग गठित करने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस समय प्रदेश में भाजपा कई भागों में विभक्त हैl इस गुट वाजी का लाभ उठाकर भाजपा सरकार का यह मुद्दा कामजाव करने के मूड में जबकि विधानसभा चुनाव का समय काफी कम है l मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार इस मामले में वित्तीय स्थिति से भी परिचत है l आयोग प्रदेश के उपमंडलों, विकास खंडों, तहसीलों और उप-तहसीलों की सीमाओं तथा उनकी संख्या की व्यापक समीक्षा करेगा। इससे भविष्य में नए जिलों के गठन की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं। भाजपा सरकारों में नये जिलो के गठन को लेकर काफी मांगे उड़ती रही लेकिन बात बाकी शीर्ष नेताओ ने अगर उसे समय ध्यान रखा होता तो भाजपा आज सत्ता से बाहर न होती l गौरतलब है कि प्रदेश में लंबे समय से नूरपुर, देहरा, पालमपुर और रामपुर को जिला बनाने की मांग विभिन्न स्तरों पर उठती रही है। वहीं बद्दी, नूरपुर और देहरा में अतिरिक्त पुलिस जिले पहले से कार्यरत हैं भाजपा सरकारों की देन है । ऐसे में प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया नए जिलों के गठन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है। भाजपा के एक पूर्व मंत्री भी नूरपुर को जिला बनाने की वकालत भाजपा सरकार में करते रहे हैं लेकिन उनको पुलिस का जिला अवश्य मिला l सरकार ने जनता की समस्या को मध्य नजर रखते हुए सर्वे करने का निर्णय लिया है ऐसे समय में जब प्रदेश में पंचायती राज संस्था चुनाव का दौर चला हुआ है l भाजपा के नेता कैबिनेट बैठक को आचार संहिता का उलघन्न बता कर मतदाताओं को गुमराह कर रहे हैं जबकि प्रदेश में नए जिलों के गठन की आवाज भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में उठी थी l सरकार अब प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 12 जिले, 81 उपमंडल, 92 विकास खंड तथा 193 तहसीलें और उप-तहसीलें संचालित हो रही हैं। आयोग इन सभी इकाइयों का विस्तृत अध्ययन करेगा। गौरतलव है कि
आयोग भौगोलिक परिस्थितियों,जनसंख्या,प्रशासनिक जरूरत, क्षेत्रों की दूरी, उपलब्ध संसाधनों और वित्तीय बोझ जैसे विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव, इकाइयों के पुनर्गठन, विलय अथवा संख्या में कटौती से जुड़े सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे।हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से कांगड़ा क्षेत्र में पिछले दो दशकों से नए जिलों के गठन की चर्चा समय-समय पर होती रही है, लेकिन भाजपा की पूर्व सरकारों ने इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया।नए जिलों के गठन का मुद्दा राजनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इससे स्थानीय भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। हालांकि सरकार ने आयोग के गठन को प्रशासनिक सुविधा और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता से जोड़कर देखा है। सरकार जल्द अधिसूचना जारी कर आयोग के कार्य, उद्देश्य और समयसीमा को स्पष्ट करेगी। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
यदि आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश का प्रशासनिक नक्शा बदलता हुआ नजर आ सकता है।

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