टोल प्लाजा टोल प्लाजा के खिलाफ प्रदेश में भड़क रहा है जन आक्रोश
टोल प्लाजा टोल प्लाजा के खिलाफ प्रदेश में भड़क रहा है जन आक्रोश
नूरपुर : विनय महाजन /
हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल में प्रवेश करने वाले वाहनों पर भारी भरकम शुल्क लगा दिया था तव इसकी व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी । हिमाचल- पंजाब बॉर्डर के साथ लगते सभी स्थानों की जनता इस बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर उतर आई थी। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखकर अपने इस फैसले को बदल डाला व वाहनों के प्रवेश शुल्क में काफी कटौती कर इसे लागू किया। सरकार द्वारा टोल प्लाजा की सीमा के 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र के लोगों को प्रवेश कर से मुक्त रखने का भी प्रावधान रखा गया ।इसी बीच प्रदेश सरकार के इन टोल प्लाजा की वैधता को हाई कोर्ट में इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि वह इन पर कानूनी आधार पर किसी प्रकार का टोल नहीं लगा सकती । एक अधिवक्ता उतांश मोगरा द्वारा इस याचिका को स्वीकार कर प्रदेश सरकार को इसका जवाब देने के निर्देश माननीय हाईकोर्ट ने दिए थे। प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष गोल-गोल ढंग से रखा व अगली तारीख ले ली।
इस संबंध में एक समाजसेवी संस्था द्वारा भी प्रदेश के सब से प्रमुख प्रवेश द्वार कंडवाल में स्थित टोल प्लाजा की कथित कार्य प्रणाली को लेकर अपनी आवाज उठाई, लेकिन कराधान विभाग इसका ना तो समाधान दे सका ना ही प्रभावित लोगों से न्याय कर सका।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ के सह निदेशक राजेश सिंह पठानिया का कहना है कि कंडवाल स्थित नाका प्रदेश की सीमा के करीब 300 मीटर आगे लगा दिया गया है। यहां तक की स्थानीय विधायक का आवास वह कारोबारी संस्थान टोल प्लाजा के करीब 100 मीटर आगे जाकर पड़ते हैं। प्रदेश की जनता को सरकार की मनमानी के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठानी होगी।

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