“ चुनावो की बेला में शराब की बोतल और पैसा और पांच साल का नुकसान”

 “ चुनावो की बेला में शराब की बोतल और पैसा और पांच साल का नुकसान”


नूरपुर : विनय महाजन /

 नूरपुर देश व प्रदेश मे चुनाव आते ही गांवों और कस्बों में अचानक “सेवा” का मौसम शुरू हो जाता है। कहीं दावतें दी जाती हैं, कहीं शराब की बोतलें बांटी जाती हैं, कहीं पैसा और कहीं छोटे-छोटे लालच देकर लोगों की सोच खरीदने की कोशिश होती है। कहीं पर बकरों और मुर्गों की बली भी कुर्बान हो जाती है l प्रश्न यह नहीं प्रश्न यह है कि देश और प्रदेश के चुनाव आयोग को इस मामले में सारी जानकारी होती है लेकिन धरातल पर कोई भी कार्यवाही इस लोकतंत्र में नहीं की जाती l दुख इस बात का नहीं कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी कुछ ऐसे होते हैं जो अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए चुनाबो के समय मतदाताओ के दरवाजे पर दस्तक देते हैंl एक हिस्सा आज भी अपने वोट और भविष्य की कीमत केवल लालच में अक्सर कुछ मतदाताओं को शराब की बोतल में तय कर देता है। यह केवल एक वोट बेचने की बात नहीं होती, बल्कि पूरे गांव, पूरे क्षेत्र और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को दांव पर लगाने जैसा होता है। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश पंचायतों में जो नए चेहरे युवा वर्ग आए हैं उन्होंने अपनी ईमानदारी के माध्यम से ऐसे लोगों को पीछे कर दिया है जो लालच की आड़ में कुर्सी पर कब्जा किए हुए थे l ऐसे भी प्रत्याशी है जो चुनाव से पहले शराब और पैसों का सहारा लेते हैं, वे दरअसल शुरुआत में ही यह संदेश दे देते हैं कि उनका राजनीति में आने का उद्देश्य सेवा नहीं, बल्कि “निवेश” करना है। और हर निवेशक अपने पैसे का कई गुना फायदा वापस लेना चाहता है। यही कारण है कि चुनाव जीतने के बाद कई लोग जनता के बीच नहीं, बल्कि अपने खर्चे की भरपाई करने में लग जाते हैं। फिर पांच साल तक सड़कें, गलियाँ अधूरी रहती हैं, विकास रुक जाता है और जनता केवल पछतावा करती रह जाती है।असल लोकतंत्र वहीं मजबूत होता है जहां वोट जाति, लालच, डर या बहकावे से नहीं, बल्कि समझदारी और ईमानदार सोच से डाला जाए। गांव और समाज का विकास किसी एक नेता से नहीं, बल्कि जागरूक मतदाता से शुरू होता है। ऐसा प्रतिनिधि चुनना जरूरी है जो चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर समय जनता के साथ खड़ा रहे। जो भाईचारे की बात करे, विकास की बात करे और राजनीति को व्यापार नहीं, सेवा समझे। ऐसा कुछ सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि अगर सरकार इस पर गौर करें तो देश में लोकतंत्र मजबूत हो सकता है नहीं तो आने वाली युवा पीढ़ी ऐसे प्रत्याशियों को माफ नहीं करेगी ऐसा की हिमाचल के पंचायती राज संस्था चुनाव प्रणाली में दो चरणों के रुझान में देखने को मिला हैl 30 मई को पंचायती राज संस्था प्रणाली का तीसरे चरण का मतदान होगा l

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