कॉर्पोरेट की कर्जमाफी और मुफ्त की रेवड़ियां वित्तीय संकट का असली कारण व पुरानी पेंशन योजना नहीं डॉ. संजीव गुलेरिया
कॉर्पोरेट की कर्जमाफी और मुफ्त की रेवड़ियां वित्तीय संकट का असली कारण व पुरानी पेंशन योजना नहीं डॉ. संजीव गुलेरिया
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा देश पर बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का अधिकार है। सरकारों की गलत वित्तीय नीतियां देश-प्रदेश को आर्थिक संकट में धकेल रही हैं। यह जानकारी एक प्रेस नोट मे न्यू पेंशन स्कीम (दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले) सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजीव गुलेरिया ने देते सरकारों की आर्थिक नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश और प्रदेश में व्याप्त आर्थिक संकट के लिए पुरानी पेंशन योजना को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से अनुचित, अतार्किक और दुर्भाग्यपूर्ण है।डॉ. गुलेरिया ने वित्तीय असंतुलन के असली कारणों को उजागर करते हुए कहा कि चाहे पूर्व की कांग्रेस सरकारें रही हों या वर्तमान की मोदी सरकार, दोनों ही कॉर्पोरेट घरानों के प्रति अत्यधिक उदार रही हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि चुनावी सभाओं में राजनीतिक पार्टियों द्वारा वोट बटोरने के लिए मुफ्त की योजनाओं (रेवड़ियों) की जो अंधाधुंध घोषणाएं की जा रही हैं, वे देश की आर्थिक रीढ़ को खोखला कर रही हैं। डॉ. संजीव गुलेरिया ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि कर्मचारी इस व्यवस्था और विकास की असली रीढ़ हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन कोई दान या विलासिता नहीं है, बल्कि यह उनके बुढ़ापे का स्वाभिमान, उनकी दवा-दवाइयों का सहारा और सम्मान से जीने का बुनियादी संवैधानिक हक है। डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि चुनावी लाभ के लिए सरकारी खजाने को मुफ्त की घोषणाओं में लुटाना तुरंत बंद किया जाए।वित्तीय संतुलन और घाटे के नाम पर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और पुरानी पेंशन के हक की बलि चढ़ाना बंद हो।< /p>

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