सड़क नहीं तो वोट नहीं: लाहौल के कुरचैड गांव का चुनाव बहिष्कार का ऐलान
सड़क नहीं तो वोट नहीं: लाहौल के कुरचैड गांव का चुनाव बहिष्कार का ऐलान
(केलांग/उदयपुर: रंजीत लाहौली) बर्फीले पहाड़ों की गोद में बसे लाहौल-स्पीति जिले के कुरचैड गांव के ग्रामीणों ने सिस्टम की बेरुखी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर सड़क मार्ग से वंचित ग्रामीणों ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी देते हुए आगामी सभी चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है।
मुख्य मुद्दे: विकास की बाट जोहता कुरचैड
ग्रामीणों ने उपायुक्त लाहौल-स्पीति को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, गांव की स्थिति आज के आधुनिक युग में भी दयनीय बनी हुई है:
अधूरा सपना: गांव के लिए सड़क का काम वर्ष 2000 में शुरू हुआ था, लेकिन विडंबना यह है कि 25 सालों में एक किलोमीटर सड़क भी वाहनों के चलने लायक नहीं बन पाई है।
शिक्षा पर ताला: गांव के एकमात्र स्कूल को बंद कर दिया गया है। अब नन्हे बच्चों को शिक्षा के लिए प्रतिदिन 16 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है।
कंधों पर 'पालकी': सड़क न होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को चारपाई या कुर्सी पर बांधकर कंधों पर ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का दर्द है कि कई मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ चुके हैं।
"हमें केवल चुनावों के समय आश्वासन मिलते हैं। जब तक धरातल पर सड़क का काम पूरा नहीं होता, तब तक हम न तो विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे और न ही लोकसभा चुनाव में।" — रवि, ग्रामीण निवासी
प्रशासन को सख्त चेतावनी
कुरचैड गांव के लगभग 15 परिवारों ने एक स्वर में फैसला लिया है कि अब वे नेताओं के खोखले वादों में नहीं आएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हर कदम पर खतरा मोल लेकर जीना उनकी नियति बन गई है, लेकिन अब वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग तभी करेंगे जब उन्हें उनका बुनियादी अधिकार यानी 'संपर्क मार्ग' मिलेगा।

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