PM के संबोधन के खिलाफ चुनाव आयोग पहुँचा विपक्ष, महिला आरक्षण बिल पर छिड़ा सियासी घमासान

 PM के संबोधन के खिलाफ चुनाव आयोग पहुँचा विपक्ष, महिला आरक्षण बिल पर छिड़ा सियासी घमासान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शनिवार को राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जहाँ पीएम ने 'महिला आरक्षण संशोधन बिल' के संसद में गिरने को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला, वहीं विपक्ष ने इसे 'आदर्श आचार संहिता' (MCC) का उल्लंघन बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।

मुख्य बिंदु: विवाद की जड़ में क्या है?

विपक्ष की शिकायत: CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

आरोप: सरकारी मंच और मशीनरी का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग।

कांग्रेस का प्रहार: मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम के भाषण को 'हताशा का प्रतीक' बताया।

चुनाव आयोग की दहलीज पर मामला

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने चुनाव आयोग से मांग की है कि प्रधानमंत्री के संबोधन की गहन जांच की जाए। उन्होंने अपने पत्र में तर्क दिया है कि चुनाव के समय सरकारी माध्यमों का उपयोग कर विपक्षी दलों पर हमला करना पूरी तरह से राजनीतिक था और यह चुनावी आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।

खरगे का तीखा पलटवार: "12 साल में कोई उपलब्धि नहीं"

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उनके बयान के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

"प्रधानमंत्री ने सरकारी संबोधन को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया। 12 साल की नाकामियों को छिपाने के लिए उन्होंने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। उनके भाषण में 'कांग्रेस' का जिक्र 59 बार आया, जबकि 'महिला' शब्द का नाम मात्र प्रयोग हुआ।"

खरगे ने इसे लोकतंत्र और संविधान का अपमान करार देते हुए कहा कि एक प्रधानमंत्री को सरकारी मंच से इस तरह की "कीचड़ उछालने वाली" राजनीति शोभा नहीं देती।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा था?

शनिवार को अपने संबोधन में पीएम मोदी भावुक और हमलावर नजर आए थे। उन्होंने विपक्षी दलों की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा:

दलहित बनाम देशहित: कुछ दलों के लिए परिवार और पार्टी का हित देश से ऊपर है।

नारी शक्ति का अपमान: जब संसद में बिल गिरा, तब कांग्रेस, TMC और सपा के सांसद मेज थपथपा रहे थे। यह मेज थपथपाना देश की करोड़ों महिलाओं के आत्मसम्मान पर चोट है।

नाम लेकर हमला: पीएम ने सीधे तौर पर कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी को महिला विरोधी करार दिया।

आगे क्या?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या चुनाव आयोग इस पर कोई कड़ा कदम उठाएगा। विपक्ष का तर्क है कि आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी चैनलों (जैसे दूरदर्शन) पर इस तरह के भाषण का प्रसारण अनुचित है। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो इस विवाद की दिशा तय करेगा।

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