जिस अधिकारी की इंटीग्रिटी प्रमाणित नहीं हो सकती थी, उसे सेवा विस्तार क्यों दिया? कांग्रेस सरकार जवाब दे : सुरेश कश्यप

 जिस अधिकारी की इंटीग्रिटी प्रमाणित नहीं हो सकती थी, उसे सेवा विस्तार क्यों दिया? कांग्रेस सरकार जवाब दे : सुरेश कश्यप

सच एक वर्ष तक क्यों छिपाया गया? प्रदेश की जनता पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है : सुरेश कश्यप


शिमला : गायत्री गर्ग /

भाजपा सांसद एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर अनेक प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में स्वयं यह दर्ज था कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, सीबीआई द्वारा चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की जा चुकी है और उसकी Integrity Certificate (विजिलेंस क्लियरेंस) जारी नहीं की जा सकती, तो फिर उसी अधिकारी को सेवा विस्तार देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।


सुरेश कश्यप ने कहा कि सरकारी पत्र में स्पष्ट शब्दों में उल्लेख है कि "Integrity cannot be certified." इसके बावजूद सेवा विस्तार दिया जाना गंभीर प्रशासनिक और नैतिक प्रश्न खड़ा करता है। प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या नियम केवल सामान्य अधिकारियों के लिए हैं या फिर कुछ लोगों के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई थी।


उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है कि यदि यह तथ्य अक्टूबर 2025 में ही सरकार के संज्ञान में था, तो इसे लगभग एक वर्ष तक जनता, न्यायालय और प्रशासनिक व्यवस्था से क्यों छिपाया गया। आखिर इस जानकारी को सार्वजनिक न करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इससे किसे लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।


सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। ऐसे समय में यदि किसी अधिकारी की सत्यनिष्ठा पर स्वयं सरकारी रिकॉर्ड प्रश्न उठा रहे थे, तो उसे सेवा विस्तार देकर प्रदेश के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की क्या आवश्यकता थी। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि कौन-सी ऐसी असाधारण परिस्थितियां थीं जिनके आधार पर स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं से हटकर निर्णय लिया गया।


उन्होंने कहा कि यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही का विषय है। यदि सरकार अपने ही आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों की अनदेखी करती है, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होता है।


सुरेश कश्यप ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, सेवा विस्तार देने की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए तथा जिन अधिकारियों और निर्णयकर्ताओं की भूमिका इस प्रकरण में रही है, उनकी जवाबदेही तय की जाए।


उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें तथ्यों को छिपाकर नहीं चल सकतीं। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जब स्वयं सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित अधिकारी की इंटीग्रिटी प्रमाणित नहीं की जा सकती थी, तो उसे सेवा विस्तार देने का निर्णय किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से लिया गया। कांग्रेस सरकार को इन सभी प्रश्नों का तथ्यात्मक और स्पष्ट उत्तर देना ही होगा।

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