चंबा की विलुप्त होती बंगद्वारी कला के उद्धारक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अमी चंद धीमान का निधन
चंबा की विलुप्त होती बंगद्वारी कला के उद्धारक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अमी चंद धीमान का निधन
अमी चंद धीमान के निधन पर कला जगत में शोक की लहर
चंबा : जितेन्द्र खन्ना /
हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले प्रख्यात चित्रकार एवं उत्कृष्ट शिल्पकार अमी चंद धीमान का रविवार को 82 वर्ष की उम्र में तड़के 3:00 बजे आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से कला जगत सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। रविवार को ही गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जहां कला प्रेमियों और स्थानीय गणमान्य लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। वह अपने पीछे कला की एक ऐसी अनमोल विरासत छोड़ गए हैं, जिसने चंबा का नाम वैश्विक पटल पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया था। वह मूल रूप से चंबा के प्रसिद्ध गुजराती-मणिकंठ चित्रकार परिवार से संबंध रखते थे।इनके पूर्वज गुजरात से चंबा से आए थे। उनकी पेंटिंग चंबा व चंडीगढ़ के संग्रहालय में भी सजाई हैं। ये पेंटिंग चंबा के जातर मेला व चंबा के नुआला पर आधारित थी।
वर्ष 1987 में राष्ट्रपति के हाथों मिला था राष्ट्रीय पुरस्कार
चंबा की लोक कला और हस्तशिल्प के संरक्षण में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ था। तत्कालीन भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय की सिफारिश पर वर्ष 1987 में नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के महामहिम राष्ट्रपति की ओर से उन्हें राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से नवाजा गया था। कला क्षेत्र में उनके इस अतुलनीय समर्पण के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कारों और कला सम्मेलनों में विशिष्ट रूप से सम्मानित किया जा चुका था।
शिल्प परिषद ने जताया शोक
चंबा शिल्प परिषद के अध्यक्ष पद्मश्री विजय शर्मा ने अमी चंद धीमान के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अमी चंद धीमान का अचानक यूं चले जाना पहाड़ी कला और संस्कृति के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है। उनकी ओर से कला के क्षेत्र में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका आने वाली सदियों तक युवा कलाकारों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

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