कांग्रेस के तीन पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोप,
कांग्रेस के तीन पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोप,
उपायुक्त को सौंपी शिकायत
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
आरोप सिद्ध होने पर निर्वाचित पार्षदों की सदस्यता पर भी पड़ सकता है प्रभाव
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला में 1 जुलाई को प्रस्तावित मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से ठीक पहले स्थानीय राजनीति में नया विवाद सामने आया है। कांग्रेस के तीन नवनिर्वाचित पार्षदों तथा एक पूर्व पार्षद प्रत्याशी पर सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में उपायुक्त कांगड़ा को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कांग्रेस नेताओं ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया है। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही निर्वाचित पार्षदों के मामलों में उनकी सदस्यता पर भी कानूनी प्रभाव पड़ सकता है।
जिन नेताओं पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें वार्ड नंबर 04 से कांग्रेस पार्षद एवं पूर्व मेयर नीनू शर्मा, वार्ड नंबर 11 से पार्षद अनुराग धीमान, वार्ड नंबर 14 से पार्षद आनोज विष्ट तथा वार्ड नंबर 17 से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी सुरेश पप्पी शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, आगामी दिनों में वार्ड नंबर 15 खनियारा से पूर्व मेयर रजनी व्यास तथा वार्ड नंबर 2 से ओंकार सिंह नैहरिया के विरुद्ध भी कथित अतिक्रमण मामलों में कानूनी राय ली जा रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आवश्यक साक्ष्य मिलने पर इन मामलों में भी उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।
गौरतलब है कि नगर निगम धर्मशाला के 17 वार्डों के लिए हुए हालिया चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 11 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 5 सीटों पर सफलता मिली, जबकि एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। ऐसे में संख्याबल के आधार पर मेयर और डिप्टी मेयर पदों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
धर्मशाला नगर निगम उसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम चुनाव में भाजपा की सफलता के पीछे सुधीर शर्मा के राजनीतिक अनुभव और चुनावी रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वहीं, मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर लगे अतिक्रमण के आरोपों ने स्थानीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो इसका प्रभाव केवल संबंधित नेताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नगर निगम की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है।

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