क्या कसूर है इन बेचारे बेजुबानों का जिनको अपना पेट पालने के लिए मौसम की हर मार को सहन करना पड़ता है
क्या कसूर है इन बेचारे बेजुबानों का जिनको अपना पेट पालने के लिए मौसम की हर मार को सहन करना पड़ता है
नुरपुर : विनय महाजन /
देश में बड़ी-बड़ी संस्थाएं इस मामले में काफी जागरुक है लेकिन धरातल पर ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जैसा की बारिश के समय में एक बेजुवान जानवर भरी बारिश मे बारिश से बचने के लिए आशियांना ढूंढता हुआ नजर आ रहा हैl सरकार इस मामले में नई-नई घोषणाएं करती हैं लेकिन धरातल पर इसका परिणाम जीरो है l इस मामले में जागरूकता लाने के लिए नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों को भी धरातल पर कार्यवाही करनी पड़ेगी जो सरकार के स्तंभ है l इस मामले में कई बैठकर हुई परिणाम फाइलों में सिमट के रह गयाl इससे बड़ा उदाहरण और क्या देखने को मिल सकता है कि सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु सरकार की नीतियों की पोल खोलते हैं जब सड़कों पर उनका दिन रात झुंड दिखाई देता है और इस झुंड के कारण कहीं दुर्घटनाएं भी होती है l आखिरकार सरकारी तंत्र कब जागेगा? ऐसा लगता है किशायद सरकार के पास गौशाला बनाने के लिए भी वित्तीय आभाव हो ऐसे में सरकार भी एनजीओ के माध्यम से आस लगाए बैठी है कि उनकी इस समस्या का समाधान हो जाए लेकिन ऐसा नहींहुआ आज तक l

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